भाग्य का निर्माता स्वयं मनुष्य ही है। पंडित राजेश अग्निहोत्री।

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देहली के मलिकपुर ,टैगोर पार्क के सामने स्थित श्री हरि मंदिर में चल रही देवी भागवत में मथुरा सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित राजेश अग्निहोत्री भगवताचार्य ने कि हमारा जीवन कोरे कागज की तरह होता है।जिस प्रकार एक विद्यार्थी को कोरी कापी दी जाती है और विद्यार्थी उस कापी में जो भी लिखता है,मास्टर साहब उसके लिखे हुए का निरीक्षण करते हैं। उसने जो लिखा है बो सही है या गलत है, उसके अनुसार उसको अंक प्राप्त होते हैं और अंकों के आधार पर है विद्यार्थी पास या फेल होता है। ठीक इसी प्रकार हमारा जीवन भी कोरी कापी की तरह है, अच्छा या बुरा कर्म रूपी जो भी हम लिखते हैं उसी के आधार पर हमारा भाग्य बनता है।या यूं कहें कि भाग्य की निर्माता हम स्वयं हैं। हमें कर्मो का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है। इसीलिए आवश्यकता इस बात की है कोई भी कर्म करने से पहले उसके परिणाम के बारे में हमें चिंतन अवश्य करना चाहिए।उस व्यवहार को दूसरे के साथ कभी नहीं करना चाहिए जो व्यवहार स्वयं को पसन्द नहीं है।प्रातःकाल की बेला में वृंदावन से पधारे आचार्य पंडित अमरेश शुक्ला, आचार्य पंडित सूरज, आचार्य विवेक शर्मा, आचार्य बंशीधर, आचार्य जतिन सारस्वत, आचार्य गोपाल शर्मा, आचार्य विशाल शर्मा, आचार्य उत्तम शर्मा, पंडित कृष्णा अग्निहोत्री एवं आचार्य पंडित शुभम अग्निहोत्री ने मंत्रोचारण के साथ पूजन सम्पन्न कराया। अन्त में मंदिर के महंत श्री महेश शर्मा, राहुल शर्मा,आशु शर्मा एवम् जगदीश अग्रवाल आदि भक्तों ने ग्रन्थ की आरती उतारी।

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