हरिद्वार (विजय पंडित)मधु दैत्य लोभ और कैटभ दैत्य ही आसक्ति है ।पंडित राजेश अग्निहोत्री भगवताचार्य। दिल्ली के मॉडल टाऊन स्थित श्री हरि मंदिर में चल रही देवी भागवत में मथुरा के सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित राजेश अग्निहोत्री भगवताचार्य ने कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता है। प्रभु ने हमें जो कार्य सौंपा है उस कार्य के प्रति हमें निष्ठावान होना चाहिए और पूर्ण समर्पण भाव सहित ईमानदारी से करना चाहिए। कार्य के समय हमारे आस पास कोई देखने वाला हो या ना हो ।इस बात का हम पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। वैसे तो हम अकेले कभी भी नहीं होते हैं। पांच लोग तो हमेशा साथ होते हैं। मिट्टी, जल, अग्नि, आकाश,और वायु ये पांच हर जीव के साथ ही हमेशा चौबीस घंटे रहते हैं क्योंकि इन पांच तत्वों से ही हमारा शरीर बना है और जहां शरीर होगा वहां ये पांचों निश्चित रूप से होंगे। मधु और कैटभ दैत्यों का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि लोभ ही मधु दैत्य है और आसक्ति ही कैटभ दैत्य है। सती चरित्र सुनाते हुए कहा कि माता सती साक्षात भगवती का ही अवतार थीं शिव जी की तरह वो भी सब कुछ जानती थीं कि प्रभु राम ब्रह्म हैं परंतु उन्होंने जो लीला की बो सांसारिक माताओं को समझने के लिए की।जिस प्रकार एक मां को अपने बच्चे को सीधा चलाने के लिए खुद उल्टा चलना पड़ता है। अन्त में शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। शुभम अग्निहोत्री, कृष्णा अग्निहोत्री और अमित शर्मा ने अपने मधुर भजनों को गाकर श्रोताओं को नृत्य करने को बाध्य कर दिया। श्री मति कृष्णा शर्मा, श्री महेश शर्मा, श्री राहुल शर्मा, श्री आशू शर्मा और श्री जगदीश जी ने आरती उतारी।