उत्तर प्रदेश वाराणसी ज्ञानवापी परिसर मे एडवोकेट कमिश्नर और 52 लोगों के बीच तहखाने की जांच हुई

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हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर आज कमिश्नर और एडवोकेट के साथ 52 यक्तियों के बीच मे तहखाने मे वीडियो ग्राफ़ी की गई इस बीच जिला प्रशासन ने शनिवार की सुबह से ही कड़ी व्यवस्था की है। वाराणसी में ज्ञानवापी परिषद से लगभग एक किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग करके सभी को रोक दिया गया है वहीं पहले दिन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे पूरी हो गई। अब शेष कार्यवाही कल रविवार को पूरी की जाएगी।

मिली जानकारी अनुसार आज सुबह 8बजे से पुरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया था प्रशासनिक टीम9 बजे तक परिसर मे मौजूद हो गई थी जिसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से एक- एक क्षेत्र का सर्वे शुरू किया गया। वहीं प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद में तहखाना खोल दिया गया है, उसमें एक जहरीला सांप भी मिला जिसे पकड़ने के लिए वन विभाग और सपेरों से भी संपर्क किया गया। दोपहर तक परिसर में टीम ने संबंधित क्षेत्रों में चक्रमण कर जायजा लिया और संबंधित की वीडियोग्राफी भी की। वही सभी यक्तियों के फोन पुलिस को दे दिए गए इसको लेकर कुछ यक्तियों ने हँगमा भी किया लेकिन कुछ लोगों को समझाने से मामला शांत हो गया और सभी ने अपने अपने फोन जमा करा दिए

तहखाने में जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से दीवारों को देखा और उनकी बनावट को भी परखा वही काफी समय से खाना बंद होने के कारण उसमें अंधेरा और दुर्गंध थी होने की वजह से टीम बैटरी वाली बड़ी टार्च लेकर पहुंची।जांच की कार्रवाई को पुख्‍ता करते हुए सुरक्षा के लिहाज से आसपास के घरों और छतों पर रूफ टॉप सुरक्षा बलों की तैनाती सुबह सात बजे ही कर दी गई। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजन के लिए आस्‍थावानों को गेट नंबर-1 से प्रवेश कराया गयाविवादित स्थान को क्यों कहा जाता है

ज्ञानवापीहिंदू पक्ष के मुताबिक, मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर के बीच 10 फीट गहरा कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कहा गया है. स्कंद पुराण में भी इसका जिक्र मिलता है. मान्यता है कि भगवान शिव ने स्वयं लिंगाभिषेक के लिए अपने त्रिशूल से ये कुआं बनाया था. शिवजी ने यहीं अपनी पत्नी पार्वती को ज्ञान दिया था इसलिए इस जगह का नाम ज्ञानवापी या ज्ञान का कुआं पड़ा. इसे लेकर कई कहानियां किंवदंतियां इलाके में प्रचलित है.

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद अयोध्या बाबरी मस्जिद के विवाद से मिलता जुलता है.यहां भी मंदिर मस्जिद दोनों बने हैं. हिंदू पक्ष का कहना है कि 1669 में मुगल शासक औरंगजेब ने यहां काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई थी. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां मंदिर नहीं था और शुरुआत से ही मस्जिद बनी थी. जैसा की इतिहास में कई मुद्दों और तथ्यों को को लेकर होता है, यहां भी इतिहासकारों में मतभेद है. कुछ इतिहासकार कहते हैं कि 14वीं सदी में जौनपुर के शर्की सुल्तान ने मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी जबकि कुछ का मानना है कि अकबर ने 1585 में नए मजहब दीन-ए-इलाही के तहत विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई.

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