हरिद्वार, विधान सभा चुनाव से पहले भाजपा को लगा झटका भाजपा से मंत्री पद पर रहे स्वामी प्रसाद मौर्या ने आज मंगलवार को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद सपा में शामिल हो गए वही वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे और अब उन्होंने भाजपा छोड़ सपा का हाथ थाम लिया।
आइए जानते हैं कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर।प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्मे मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से लॉ में स्नातक और एमए की डिग्री की हासिल की है। 1980 में उन्होंने राजनीति में सक्रिय रूप से कदम रखा। वह इलाहाबाद युवा लोकदल की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने और जून 1981 से सन 1989 तक महामंत्री पद पर रहे। इसके बाद 1989 से सन 1991 तक यूपी लोकदल के मुख्य सचिव रहे। मौर्य 1991 से 1995 तक उत्तर प्रदेश जनता दल के महासचिव पद पर रहे।ऐसा माना जा रहा है कि अपने बेटे के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या भाजपा से टिकट मांग रहे थे लेकिन भाजपा का रुख साफ न होने के चलते मौर्या ने इस्तीफा दिया है। बताते चलें कि स्वामी प्रसाद मौर्या ने की बेटी संघमित्रा मौर्या भी भाजपा के टिकट से सांसद हैं।
मौर्या ने अपने बेटे के लिए भाजपा से टिकट मांग रहे हैं। चर्चाएं तो यहां तक है कि स्वामी प्रसाद मौर्या का टिकट भी कटने वाला था इसी के चलते आगामा चुनाव के लिए आचार सहिंता लगते ही स्वामी प्रसाद मौर्या ने इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में सक्रिय न रहने के चलते जनता में नाराजगी थी। जिसके चलते इनका टिकट कटने वाला था।स्वामी प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, मेरी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। मैंने सामाजिक न्याय के लिए लगातार संघर्ष किया है। आगे भी करता रहूंगा। मुझे जहां भी सामाजिक न्याय साकार होता दिखेगा, मैं वहीं रहूंगा।अपना इस्तीफा राजभवन भेजने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने तमाम सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।’
