विकास दुबे की पत्नी ऋचा बोली- चाहे बंदूक उठानी पड़े एक दिन करूंगी सबका हिसाब

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कानपुर का मोस्टवांटेड विकास दुबे को यूपी पुलिस ने शुकवार सुबह 6:35मिनट पर एनकाउंटर कर दिया था जिस पर 5लाख का ईनाम था जब इसकी सूचना पुलिस ने विकास दुबे कि पत्नी को दी उसके बाद वह फूट फूट कर रोई जिसके बाद पुलिस ने विकास दुबे कि बॉडी उसके बहनौई को सौपी इस दौरान ऋचा ने मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों को भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए कहा कि वक्त आने पर मैं सबका हिसाब करूंगी. ऋचा दूर से ही मीडिया कर्मियों को कोसते हुए कैमरे में कैद हो गई. विकास के अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी, बेटे के आलावा सिर्फ एक निकट के रिश्तेदार मौजूद रहे. वहीं कई थानों की फोर्स मौजूद रही.

मिलि जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के मोस्ट वांटेड अपराधी विकास दुबे को यूपी एसटीएफ ने मार गिराया है. शुक्रवार देर शाम उसका भैंसा कुंड पर अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान मीडिया का भारी जमावड़ा मौजूद था. इस दौरान ऋचा ने मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों को भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए कहा कि वक्त आने पर मैं सबका हिसाब करूंगी. ऋचा दूर से ही मीडिया कर्मियों को कोसते हुए कैमरे में कैद हो गई. विकास के अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी, बेटे के आलावा सिर्फ एक निकट के रिश्तेदार मौजूद रहे. वहीं कई थानों की फोर्स मौजूद रही.

विकास दुबे के बाद उसके परिवार मे उसकी पत्नी और एक नाबालिक बेटा है पुलिस ने उसकी पत्नी ऋचा को पुछताछ के लिए गिरफ्तार किया था जिसके बाद उनको छोड दिया गया था लेकिन इसके साथ ही इस एनकाउंटर से जुड़े बहुत सारे सवाल भी उठने लगे हैं. पुलिस की भूमिका पर भी कई सवाल उठ रहे हैं. पुलिस को अब इन सवालों का जवाब कोर्ट में देना होगा. साबित करना होगा कि उन्होंने ये फायरिंग अपनी जान बचाने के लिए की थी. जाहिर है आने वाले दिनों में पुलिसवालों पर हत्या का मुकदमा चलेगा और मामले की जांच होगी

यूपी पुलिस पर एनकाउटर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है पुलिस वालो पर हो सकता है मर्डर का केस दर्ज एनकाउंटर के बाद पुलिस को साबित करना होता है कि उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए गोली चलाई थी. लेकिन अगर साबित नहीं होता है तो पुलिस को सजा भी दी जाती है.

  1. 1992 में पंजाब के अमृतसर में दो पुलिसकर्मियों ने एक 15 साल के एक नाबालिग का एनकाउंटर कर दिया था. मामले की जांच हुई और दो साल पहले यानी 26 साल बाद दोनों पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
  2. साल 1999 में देहरादुन में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था. रणवीर नाम के एक शख्स की एनकाउंटर में हत्या कर दी गई. इस केस में जांच के बाद 18 पुलिसकर्मियों को जून 2014 में उम्रकैद की सजा दी गई. बाद में 11 को रिहा कर दिया गया.
  3. जुलाई 1991 में पीलीभीत में 47 पुलिसकर्मियों ने 11 सिखों को आतंकी बताकर एनकाउंटर में मार गिराया था. साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी

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