हरिद्वार,पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव होने जा रहा है मतदान खत्म होने के बाद जो एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ रहे हैं, बो यही इशारा कर रहे हैं कि बंगाल के रण में इस बार ममता बनर्जी का जादू चलता नहीं दिख रहा है. बंगाल की जनता ने परिवर्तन का मन बना लिया जहां आठ में से छह पोल भाजपा की ऐतिहासिक जीत और सत्ता परिवर्तन का इशारा कर रहे हैं। वहीं, असम और पुदुचेरी में भाजपा-एनडीए गठबंधन अपनी सत्ता बरकरार रखता दिख रहा है। दक्षिण की बात करें तो केरल में यूडीएफ की शानदार वापसी हो रही है, जबकि तमिलनाडु में द्रमुक गठबंधन आगे है। आइए, विस्तार से सभी आंकड़ों पर नजर डालते हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 10 प्रमुख एग्जिट पोल्स के आंकड़े सामने आ चुके हैं, जो राज्य में एक बेहद रोमांचक और उलझी हुई चुनावी तस्वीर पेश कर रहे हैं। 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। सामने आए 10 में से छह सर्वे सत्ताधारी द्रमुक गठबंधन की शानदार वापसी का साफ संकेत दे रहे हैं।
‘प्रजा पोल’ (148-168 सीटें) और ‘चाणक्य स्ट्रैटजी’ (145-160 सीटें) ने द्रमुक+ को भारी बहुमत मिलने का अनुमान जताया है। हालांकि, ‘जेवीसी’ और नए सर्वे ‘वोट वाइब’ ने एनडीए के पक्ष में माहौल दिखाते हुए सबको चौंका दिया है। ‘जेवीसी’ ने एनडीए को 128-147 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत दिया है, जबकि ‘वोट वाइब’ ने भी एनडीए को 114-124 सीटें देकर उसे सत्ता के बेहद करीब या पार पहुंचा दिया है।
इन सबके बीच, सबसे बड़ा सियासी भूचाल अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके लाती दिख रही है। सबसे ज्यादा हैरानी भरोसेमंद माने जाने वाले ‘एक्सिस माय इंडिया’ के आंकड़ों ने पैदा की है, जिसने टीवीके को 98 से 120 सीटें देकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का अनुमान जताया है।
वहीं, ‘कामाख्या एनालिटिक्स’ के सर्वे में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल रहा है, लेकिन टीवीके 67-81 सीटें जीतकर राज्य में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में खड़ी नजर आ रही है। कुल मिलाकर इन विरोधाभासी और दिलचस्प एग्जिट पोल्स ने तमिलनाडु के चुनावी नतीजों को पूरी तरह से अप्रत्याशित बना दिया है, जिसका असली फैसला मतगणना के दिन ही होगा।
2026 का यह विधानसभा चुनाव बंगाल के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. अगर एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा सत्ता में आती है, तो यह भारतीय राजनीति की दिशा बदल देगा. मतगणना के दिन तक सस्पेंस बना रहेगा, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि दीदी के लिए अपनी कुर्सी बचाना इस बार लोहे के चने चबाने जैसा है. भाजपा ने जिस तरह से बूथ स्तर पर मैनेजमेंट किया और धुआंधार रैलियां कीं, उसका प्रतिफल इन आंकड़ों में झलकता है. वहीं टीएमसी अभी भी इस भरोसे में है कि उनकी सरकारी योजनाएं उन्हें जीत दिला देंगी. अब देखना यह है कि 4 मई को जब ईवीएम का पिटारा खुलेगा, तो उसमें से ‘कमल’ निकलता है या फिर दीदी की ‘घास-फूल’.

