उत्तराखंड, लिव-इन के भी नियम कड़े; लागू हुआ UCC संशोधन अध्यादेश

हरिद्वार,उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश 2026 लागू हो गया है, जिससे लिव-इन रिलेशनशिप और शादियों के नियम कड़े हो गए हैं। नए नियमों के तहत धोखाधड़ी, जबरदस्ती या पहचान छिपाकर रिश्ता बनाने पर 7 साल तक की कैद हो सकती है। यह कानून 27 जनवरी 2025 से राज्य में प्रभावी हैइसके लागू होते ही राज्य में विवाह, पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं

 

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि विवाह के किसी भी पक्ष ने अपनी पहचान से संबंधित गलत जानकारी दी है, तो इसे विवाह को शून्य घोषित करने का आधार माना जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाकर शादी करता है, तो उसके खिलाफ अब भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त प्रावधान

 

अध्यादेश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कड़े नियम जोड़े गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी के माध्यम से लिव-इन संबंध स्थापित करता है, तो उसे सात साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके अलावा, धारा 380(2) के तहत प्रतिबंधित श्रेणियों या खून के रिश्तों में लिव-इन संबंध रखने पर भी सात साल तक के कारावास का प्रावधान किया गया है। यदि कोई वयस्क किसी नाबालिग के साथ लिव-इन में रहता है, तो उसे छह महीने की जेल और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

 

अब लिव-इन संबंध समाप्त होने पर निबंधक की ओर से दोनों पक्षों को निर्धारित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। विवाह, तलाक या लिव-इन के पंजीकरण को निरस्त करने का अधिकार महानिबंधक के पास होगा, हालांकि इससे पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।

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