(ब्यूरो चीफ रजनीश दीक्षित उत्तराखंड)केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों के दुरुपयोग को रोकने और खर्च कम करने के लिए ‘एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी’ नीति लागू की है. इस नीति के तहत किसी अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी.
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार के अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों, या अर्ध-सरकारी संगठनों के वाहनों का उपयोग भी नहीं कर सकेंगे। हालांकि, अगर अधिकारी किसी आफिशियल दौरे या सरकारी कार्य के सिलसिले में संबंधित संस्था में मौजूद हैं, तो उस स्थिति में वाहन का उपयोग किया जा सकेगा।
विभाग ने बताया कि उक्त आदेश सितंबर 2022 में जारी दिशा-निर्देशों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। नया कार्यालय ज्ञापन सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को भेज दिया गया है, ताकि पूरे केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।
सरकार ने इसलिए उठाया सख्त कदम
केंद्र का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य सरकारी संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना, एक ही अधिकारी को कई वाहनों के आवंटन जैसी व्यवस्था पर रोक लगाना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इससे सरकारी वाहनों की डुप्लीकेशन रुकेगी, ईंधन और रखरखाव पर होने वाला खर्च कम होगा साथ ही सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
वित्तीय अनुशासन को मिलेगी मजबूती
केंद्र सरकार का मानना है कि एक हकदार अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी सिद्धांत के तहत लागू की गई यह व्यवस्था सरकारी संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को भी मजबूती मिलेगी।
