ग्वालियर के तानसेन नगर में एक धार्मिक आयोजन में मथुरा के सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित राजेश अग्निहोत्री जी ने आज की बहन बेटियों की मानसिकता पर चिंतित होते हुए कहा कि आज की बहन बेटियों की मानसिकता को क्या हो गया है। जिसे देखो वही रील बनाने में लगीं पड़ीं हुईं हैं और वो भी फूहड़पन की रीलें बना रहीं हैं।ये अच्छा संकेत नहीं है। यदि आपको रील बनानी ही है तो धार्मिक रील बनाओ। पूजा करते हुए, अपने सास ससुर की सेवा करते हुए, अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देते हुए, या फिर वीरता से ओतप्रोत रील हो जैसे घुड़सवारी करते हुए, तलवार वाजी करते हुए, जूडो-कराटे सीखते हुए, किसी को नदी में डूबते वाले बच्चे को बचाते हुए,या फिर परोपकार करते हुए, साधु-संतों ब्राह्मणों का आदर सम्मान करते हुए।इस तरह की भी तो रील बनाई जा सकती हैं। जिससे कि अन्य बहन बेटियां आपकी रील से प्रेरणा ले सकें। नृत्य करते हुए रील बनाकर आप दूसरों को क्या प्रेरणा दे सकती है ? हालांकि नृत्य करना कोई बुरी बात नहीं है परन्तु नृत्य करते समय वेषभूषा शालीनता की होनी चाहिए और अपने घर में कोई आयोजन हो तो नृत्य किया जा सकता है परन्तु नृत्य में फूहड़पन नहीं होना चाहिए। आप अपने आप को पहचानने का प्रयास करें। आप लक्ष्मी हैं, आप शक्ति के रूप में मां दुर्गा हैं आप वीरता में लक्ष्मीबाई और दुर्गावती हैं,आप त्याग में मां पन्ना बाई हैं। आपने ही ध्रुव, प्रह्लाद जैसे भक्तों को जन्म दिया, आपने शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे वीर पुरुषों को जन्म दिया। और तो और आपके यहां श्री कृष्ण और श्री राम ने भी पुत्र के रूप में अवतार लिया। आप सोचो क्या आपकी रील को आपके माता-पिता,भाई, पुत्र देख सकते हैं यदि देखते भी हों तो वे रील देखकर शर्मिंदा होते होंगे या गौरवान्वित होंगे।रील बनानी ही है तो ऐसी बनाओ जिसे देखकर आपके परिवार के लोग गौरवान्वित हैं।रील के कारण पति पत्नी में दरारें पड़ रहीं हैं ,पति पत्नियों में दूरियां बढ़ रहीं हैं। परिवार बिखर रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं।ऐसी रीलें बनाकर आप अपनी संतानों को क्या संदेश दे रहीं हैं? क्या आप अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाएंगी? हो सकता है कुछ बहन बेटियों को हमारी बात अच्छी न लगे तो मैं उनसे पहले ही क्षमा मांग लेता हूं परन्तु यह कड़वी दवाई की तरह सच्चाई है।
रील के कारण टूट रहे हैं परिवार और पति पत्नी के सम्बन्ध – पंडित राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य
