हरिद्वार,पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बीते शुक्रवार को हुई 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब रेट फिर से बढ़ा दिए हैं. इस बार कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है.
बाजार विश्लेषकों और उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर जारी कूटनीतिक और सैन्य संकट का सीधा परिणाम है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध और ‘हॉर्मुज़ स्ट्रैट’ मार्ग पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं.
इसके चलते भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को भारी दैनिक घाटा उठाना पड़ रहा था. हालांकि पिछले हफ्ते हुई 3 रुपये की बढ़ोतरी से कंपनियों के घाटे में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई थी, लेकिन लागत और बिक्री मूल्य के बीच के बड़े अंतर (अंडर-रिकवरी) को पाटने के लिए यह ताजा बढ़ोतरी की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकट जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में किश्तों में ऐसी और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
पेट्रोल और डीजल के दामों में इस तरह की लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण बहुत बड़ी वजह हैं। दरअसल, पश्चिमी एशिया के देशों में चल रहे संघर्ष और युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस विवाद के कारण समुद्री व्यापार के सबसे अहम रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आ गई है। इसी साल 28 फरवरी से अमेरिका और इस्राइल का ईरान के साथ युद्ध शुरू हो गया था, जिसके बाद से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही है, हालांकि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान इस इलाके में लंबे समय के युद्धविराम के लिए बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
पूरी दुनिया में ईंधन को लेकर इतना बड़ा संकट क्यों खड़ा हो गया है?
पेट्रोल और डीजल के दामों में इस तरह की लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण बहुत बड़ी वजह हैं। दरअसल, पश्चिमी एशिया के देशों में चल रहे संघर्ष और युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस विवाद के कारण समुद्री व्यापार के सबसे अहम रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आ गई है। इसी साल 28 फरवरी से अमेरिका और इस्राइल का ईरान के साथ युद्ध शुरू हो गया था, जिसके बाद से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही है, हालांकि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान इस इलाके में लंबे समय के युद्धविराम के लिए बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
तीन रुपये बढ़ने से तेल कंपनियों को कितना फायदा मिला?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जब तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। तब सरकारी तेल कंपनियों को कुछ हद तक राहत मिली। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इस बढ़ोतरी के बाद कंपनियों का दैनिक घाटा करीब 25 फीसदी कम होकर 750 करोड़ रुपये रह गया है। पहले ये लगभग 1,000 करोड़ तक पहुंच गया था। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, तेल कंपनियों को घाटे की भरपाई के लिए किसी राहत पैकेज या सब्सिडी पर विचार नहीं किया जा रहा है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, इसके बावजूद सरकारी कंपनियां 15 मई तक पेट्रोल और डीजल को पुराने दामों पर बेचती रहीं।
