वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में स्पीक मैके द्वारा सूफी कव्वाली कार्यक्रम का सफल आयोजन*

Uttrakhand,वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में स्पीक मैके के तत्वावधान में एक भव्य सूफी कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रामपुर घराने के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सूफी कव्वाल शाहिद नियाज़ी एवं सामी नियाज़ी (नियाज़ी ब्रदर्स) ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

 

SPIC MACAY, वर्ष 1977 में स्थापित एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थान है,

जो पिछले कई दशकों से भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और कला को युवाओं तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

 

शाहिद सामी नियाज़ी जी भारत के ऐतिहासिक रामपुर घराना की लगभग 250 वर्षों पुरानी समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने उस्ताद गुलाम आबिद नियाज़ी, उस्ताद रईस उद्दीन वारसी एवं उस्ताद सखावत हुसैन खान नियाज़ी जैसे महान गुरुओं से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की है।

 

नियाज़ी ब्रदर्स ने अपनी प्रभावशाली और आत्मीय प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-विदेश में भारतीय सूफी संगीत को एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नियाज़ी ब्रदर्स के साथ मंच पर संगतकार रहे — कोरस में मुक़र्रम नियाज़ी, माजिद नियाज़ी, हमीद हुसैन एवं मुज़फ़्फ़र अली, ढोलक पर वासिफ़ अहमद,

तथा तबला पर विजय कुमार।

 

विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में नियाज़ी बंधुओं ने अपनी टीम के साथ सूफियाना अंदाज़ में शानदार प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित विद्यार्थियों से भरपूर सराहना एवं तालियां बटोरीं। अपनी कव्वालियों के माध्यम से उन्होंने प्रेम, सौहार्द एवं सूफी दर्शन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिकता एवं भावनात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

 

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए सूफी संगीत की परंपरा, उसकी गहराई एवं उसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

साथ ही विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, रजिस्ट्रार डॉ राजेश उपाध्याय, डॉ मनोज पांडा, निदेशक डब्लू आई टी, श्रीमती विद्या श्रीवासन, स्पीक मैके उपाध्यक्षा ने सभी कलाकारों को प्लांटर देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय एवं लोक कलाओं से जोड़ना, उनमें सांस्कृतिक संवेदनशीलता का विकास करना तथा कला के माध्यम से समग्र व्यक्तित्व निर्माण को प्रोत्साहित करना है।

 

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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