पीएम मोदी की राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन बैठक, तैयारियों की हुई समीक्षा

हरिद्वार,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के मद्देनजर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में राज्य में ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के चलते पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चर्चा हो रही है। इस बैठक में अधिकतर राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच अहम वर्चुअल मीटिंग कर रहे हैं. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के खतरे को देखते हुए यह बैठक बुलाई गई है. इस बैठक का मकसद साफ है, दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल मचे, भारत में तेल, गैस और जरूरी सामानों की सप्लाई रुकनी नहीं चाहिए.

 

पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले ही देश को आगाह किया था कि मिडिल ईस्ट का यह संकट भारत के लिए लंबी मुसीबतें खड़ी कर सकता है. केंद्र सरकार अपनी तरफ से हर मुमकिन कदम उठा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को कामयाब बनाने की असली जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर है. इसलिए, उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे अपने-अपने राज्यों में ऐसी व्यवस्था करें जिससे आम आदमी की जरूरत की चीजों पर कोई आंच न आए. उन्होंने याद दिलाया कि जब देश संकट में होता है, तो केंद्र और राज्यों को मिलकर एक परिवार की तरह लड़ना पड़ता है.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति की तुलना ठीक 6 साल पहले आई कोरोना महामारी से की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह कोविड-19 के दौरान केंद्र और राज्यों ने ‘टीम इंडिया’ बनकर काम किया था, आज फिर उसी जज्बे की जरूरत है. आपको याद होगा कि मार्च 2020 में जब पूरी दुनिया थम गई थी, तब पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ लगातार मीटिंग्स का सिलसिला शुरू किया था. उस वक्त पहली मीटिंग 20 मार्च 2020 को हुई थी, जिसके ठीक चार दिन बाद देश में तीन हफ्ते का लॉकडाउन लगा था. उस मुश्किल दौर में उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा बार मुख्यमंत्रियों से बात की थी ताकि टेस्टिंग, ट्रैकिंग और इलाज में कोई कमी न रहे.

 

2021 में जब वैक्सीनेशन का दौर आया, तब भी पीएम मोदी ने संघीय ढांचे की मजबूती पर भरोसा जताया था. उन्होंने राज्यों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन देने का एलान किया था. उन्होंने साफ कहा था कि वैक्सीन पर किसी भी राज्य सरकार को एक पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. उस समय राज्यों ने भी राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र का साथ दिया था, जिसकी तारीफ पीएम मोदी ने खुद अपने एक लेख में भी की थी. उन्होंने इसे भागीदारी का एक नया मॉडल बताया था

बैठक में कौन-कौन मुख्यमंत्री शामिल हुए?

बैठक में आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू सहित कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी इस बैठक में मौजूद थे।

 

एक सूत्र ने बताया, प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और राज्यों की तैयारियों व योजनाओं की समीक्षा की। बैठक का फोकस ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत तालमेल सुनिश्चित करना था। आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक करेगा।

 

संकट पर पहले हुई थी सर्वदलीय बैठक

सरकार ने 25 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर राजनीतिक दलों के नेताओं को जानकारी देने के लिए सर्वदलीय बैठक भी की थी, जिसमें स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी गई। 23 मार्च को लोकसभा में बयान देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रह सकती हैं और उन्होंने देश से एकजुट और तैयार रहने का आह्वान किया था, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था।

 

भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकार

इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।

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