Haridwar,मोदी सरकार के पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने को लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हमलावर हैं. इससे पहले कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी.उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है. ममता बनर्जी ने कहा है कि यह वैसा ही है, जैसे साड़ी की दुकान में खरीदारी करना. अगर आप साड़ी की कीमतें पूछें तो दुकानदार आपको 1000 रुपए बताएगा, लेकिन मोलभाव करने के बाद वह 400 रुपए पर ही मान जाएगा. ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा है कि इस तरह पहले गैस के दाम बढ़ाए गए. अब एक्साइज घटाने की बात हो रही है. सवाल यह है कि आखिर कीमतें कहां जाकर स्थिर होंगी? ममता बनर्जी ने अपने बयान में जनता की समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि मेरी प्राथमिकता है कि लोगों को किसी तरह की असुविधा न हों.
वही मिडिल ईस्ट में युद्ध जारी है। इसकी वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बाधित हो चुका है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत आसमान छूती जा रही है। इस बीच भारत सरकार ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस निर्णय के पीछे के तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार के पास केवल दो रास्ते थे। या तो ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाए या फिर देश के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाने के लिए सरकार खुद वित्तीय बोझ उठाए।
पुरी ने एक्स पर लिखा, “पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में 20% से 50% तक की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए खुद वित्तीय नुकसान उठाने का साहसी फैसला किया है।”
मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भारी घाटा हो रहा था। टैक्स में इस कटौती से इन कंपनियों के घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती का तुरंत पेट्रोल पंप की कीमतों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, क्योंकि यह मुख्य रूप से कंपनियों के बढ़ते घाटे को थामने के लिए है।
आपको बता दें कि घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डीजल के निर्यात पर 21.5 प्रति लीटर और एटीएफ (एटीएफ) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है। विमानन टर्बाइन ईंधन पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को संशोधित किया गया है ताकि घरेलू उपलब्धता बनी रहे।
वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष उत्पाद शुल्क को 13 से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर इस शुल्क को 10 रुपये से घटाकर शून्य (0) कर दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
